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सपने जिंदा रहें

अशोक दर्द

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सपने जिंदा रहें....
        
                                                    
                            
प्रेम के बाग - तड़ाग सब
सुगंध और निर्मलता से सदा भरे रहें
धरा की सारी घासनियां सारे पर्वत
मोहब्बतों से हरे - भरे रहें।

फिजाओं में बारूद की गंध से
मानवता के परिंदे कहीं उड़ न जाए
दायित्व -बोध रहे सबको कि
खुशहाल बस्तियां कहीं उजड़ न जाएं।

अपने स्वार्थ के लिए दुनिया में
अलगाव की दीवारें चिनकर
मानवता को जाति- धर्म के पिंजरों में
कोई बंद न कर पाए ।

हमारी सब चिंताओं में - कविताओं में
पहले पर्यावरण हो
इस खूबसूरत धरती को और खूबसूरत
बनाने का प्रण हो।

विश्व के तरकश में हमेशा
विकृतियों से लड़ने के वाण हों
दुनिया की सारी प्रार्थनाओं में
विश्व - कल्याण हो।

हर किताब से विध्वंस शब्द हटाकर
निर्माण लिखा हो
दुनिया के तमाम मील पत्थरों पर
विश्व- बंधुत्व का गान लिखा हो।

बस इतनी सी चाहत है
मानवता के खिलाफ कोई
बोल न पाए
विश्व बंधुत्व और सौहार्द के
झरनों में नफ़रत और वैमनस्य कोई
घोल न पाए .....।
एक महीने पहले
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