विज्ञापन

तुम थे मेरे ग़म ख़्वारो में।

Asha Singh

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी कुछ थी मैं कभी कुछ हूई
        
                                                    
                            
कुछ और हो कर रह गयी
ऐ ज़िंदगी तेरे कूचे में बैचैन
हो कर रह गयी।
है ज़ख़्मों की फेहरिस्त बड़ी
कुछ वक्त के संग भर गए
कुछ ज़ख़्म तेरे ऐसे है जो
जस के तस हीं रह गए
मेहरबानीयां तेरी यूं रही
ना जी सके ना मर सके
सच तो ये है जिंदगी तुम्हें
प्यार भी ना कर सके
दिल डूबा डूबा है मेरा
आंखों के आबशारों में
दिल तुमने भी तो दुखा दिया
तुम थे मेरे ग़म ख़्वारो में।
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajan

30 कविताएं

View Profile