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तुम थे मेरे ग़म ख़्वारो में।

                
                                                         
                            कभी कुछ थी मैं कभी कुछ हूई
                                                                 
                            
कुछ और हो कर रह गयी
ऐ ज़िंदगी तेरे कूचे में बैचैन
हो कर रह गयी।
है ज़ख़्मों की फेहरिस्त बड़ी
कुछ वक्त के संग भर गए
कुछ ज़ख़्म तेरे ऐसे है जो
जस के तस हीं रह गए
मेहरबानीयां तेरी यूं रही
ना जी सके ना मर सके
सच तो ये है जिंदगी तुम्हें
प्यार भी ना कर सके
दिल डूबा डूबा है मेरा
आंखों के आबशारों में
दिल तुमने भी तो दुखा दिया
तुम थे मेरे ग़म ख़्वारो में।
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एक घंटा पहले

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