ऐ स्त्री, अपने अस्तित्व की पहचान करो,
खुद के सपनों में खुद ही जान भरो।
अपने जीवन का नव निर्माण करो,
खुद के सपनों की खुद ही उड़ान भरो।
जीवन भर किसी का सहारा लेने से बेहतर,
तुम हो जाओ आत्मनिर्भर।
स्त्री हो ,अपनी शक्ति पहचानो
खुद में कुछ कर गुजर जाने का ,
जुनून भर डालो।
हृदय की गहरी चोटों को ,
तुम मत कभी दबा लेना।
उन चोटों की सपनों रूपी ,
माला तुम बना लेना।
जैसे झाँसी वाली रानी,
किरण बेदी और कल्पना चावला,
ने नहीं मानी कभी हार।
वैसे ही तू आगे बढ़ जा,
कर ले अपने सपनों को साकार।
हाँ तुम्ही हो देश का भविष्य ऐ स्त्री ,
उठों और कंधे से कंधा मिलाकर नव- निर्माण करो।
अपने अस्तित्व को पहचानो
सपनों को पूरा करने की ठानो
हाँ तुम ही हो देश के भविष्य ,
तुम से ही जन्म लिया राजाओं, शूरवीरों ने।
हाँ तुमको ही जगत जननी ,
माना है इस पूरे संसार ने।
ऐ स्त्री, अपने अस्तित्व की पहचान करो,
खुद के सपनों में खुद ही जान भरो।
अपने जीवन का नव निर्माण करो,
खुद के सपनों की खुद ही उड़ान भरो।
-आशा