आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

ऐ स्त्री

                
                                                         
                            ऐ स्त्री, अपने अस्तित्व की पहचान करो,
                                                                 
                            
खुद के सपनों में खुद ही जान भरो।
अपने जीवन का नव निर्माण करो,
खुद के सपनों की खुद ही उड़ान भरो।

जीवन भर किसी का सहारा लेने से बेहतर,
तुम हो जाओ आत्मनिर्भर।
स्त्री हो ,अपनी शक्ति पहचानो
खुद में कुछ कर गुजर जाने का ,
जुनून भर डालो।

हृदय की गहरी चोटों को ,
तुम मत कभी दबा लेना।
उन चोटों की सपनों रूपी ,
माला तुम बना लेना।

जैसे झाँसी वाली रानी,
किरण बेदी और कल्पना चावला,
ने नहीं मानी कभी हार।
वैसे ही तू आगे बढ़ जा,
कर ले अपने सपनों को साकार।

हाँ तुम्ही हो देश का भविष्य ऐ स्त्री ,
उठों और कंधे से कंधा मिलाकर नव- निर्माण करो।
अपने अस्तित्व को पहचानो
सपनों को पूरा करने की ठानो

हाँ तुम ही हो देश के भविष्य ,
तुम से ही जन्म लिया राजाओं, शूरवीरों ने।
हाँ तुमको ही जगत जननी ,
माना है इस पूरे संसार ने।

ऐ स्त्री, अपने अस्तित्व की पहचान करो,
खुद के सपनों में खुद ही जान भरो।
अपने जीवन का नव निर्माण करो,
खुद के सपनों की खुद ही उड़ान भरो।
-आशा
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर