परेशान हो रहा है आमजन
नहीं मिल रहा है पूरा ऑक्सीजन।
हो रहा है प्रदूषण हर रोज़
दिल्ली हो या जिस शहर में हो ताज़
शासन ने लगाया था अनुमान
दिवाली पर आतिशबाज़ी से होगा प्रदूषण
फेफड़ों में जायेगा धुआँ व कण ।
आतिशबाज़ी को समय की लगी पाबंदी।
प्रदूषण से नहीं मिली आज़ादी।
शासन ने अब लगाया अनुमान
पराली जला रहा है किसान
पड़ौसी राज्यों से आ रहा है धुआँ
हो रहा है प्रदूषण, घुट रहा है दम।
नहीं लगा रहे हैं सही अनुमान
बन रहे हैं एक्सप्रेस वे,
बन रहे हैं स्टेशन मैट्रो
हो रहा है विकास
उखाड़ रहे हैं हज़ारो,लाखों पेड़
दे रहे थे मुफ़त ऑक्सीजन
स्वस्थ हवा लेंने को सुबह घूमता आमजन।
नहीं फूलता था इतना दम,
पेड़ के नीचे मिले आराम।
हाय प्रदूषण असहाय है शासन ।
प्रदूषण दूर हो,करें सभी सहयोग
विधुत चालित वाहनों का करें प्रयोग।
विकास को न उखाड़े पुराने पेड़
अनुमान लगाओ,मुफ़त ऑक्सीजन का योग।
करें योग,शरीर रहेगा निरोग।
न कहेंगें हाय प्रदूषण,असहाय शासन ।
अरविन्द कुमार शर्मा 'कवि'
पश्चिमपुरी चौराहा
शास्त्रीपुरम मार्ग
आगरा
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