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ये परिस्थिकी तंत्र बड़ा

Arvind Kumar Shivhare

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            राज छिपे कितने
        
                                                    
                            
जिसकी गहराई में
कोई नहीं उतरना चाहे
खारे पानी की खाई में

निकले हो तेरह तेरह
नग जिसके मंथन में
राज छुपे होंगे कितने
उस अथाह के मन में

ये परिस्थिकी तंत्र बड़ा
संपति का परकोट खड़ा
इसके सर्प मकर विकराल
किस छन बने काल का काल

इसने नमक चुराकर
दुनिया को मधुर बनाया
चुटकी भर नमक को पाकर
व्यंजन इतना इतराया

सरिताये सारी इसकी
चाहे घातक या अच्छी
चंदा सूरज भी इसके
बिन पंख पालतू पक्षी

महिमा है इसकी भारी
ये श्रीहरि का ससुराल
बड़ी खुशामद डुबो डुबो के
करते लालो के लाल
एक महीने पहले
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