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रह के खामोश

Arvind Agrawal

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            रह के खामोश, करते हैं बातें,
        
                                                    
                            
सुनते बहुत हैं, सुनाते नहीं हैं.

है मुहब्बत बे -इंतहा उनसे,
लेकिन कभी भी जताते नहीं हैं.

हैं ख़्वाहिश मिलने की उनसे,
मगर कभी भी बताते नहीं हैं.

रूठना न हमसे, भूल कर कभी,
हम वो शख्श हैं, जो मनाते नहीं हैं.

कर्ज़ा न देना हमें तुम कभी भी,
लेते हैं हम मगर, चुकाते नहीं हैं.

अकेला न होने देंगे तुम्हें हम,
पकड़ा जो हाथ, छुड़ाते नहीं हैं,

अरविन्द कुमार अग्रवाल
एक वर्ष पहले
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