माँ,
ईश्वर का साक्षात अवतार हैं तू,
ब्रह्मांड से विशाल है तू,
ममत्व जग का तुझमे समाता हैं,
तेरे आँचल में ही सुकून आता हैं,
लुटा कर ममता के खजाने,
गढ़ देती हैं हमारी दुनिया,
संस्कारो से भर नींव हमारी,
खूबसूरत बनाती हैं दुनिया,
क्यो जाऊ मैं कही कुछ खोजने,
जब चरणों मे है तेरे जहाँ की खुशियां।।
- अरुणिमा बहादुर खरे