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सुना है तुम फिर शहर गए , तुम किधर गए

Arungovind Maurya

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अभी तो मेरे साथ थे !
        
                                                    
                            
तुम किधर गए

हम साथ है !
हा, ये कहा था तुमने
सुना है कि तुम मुकर गए
तुम किधर गए

खोटी प्रेम से अंजान था मै
तो दिल बहलाने का सामान था मै

यकीन के धागे में थे हम
फिर ये मोती कैसे बिखर गए
तुम किधर गए

बैर दुनिया से ठाना था
तुम्हे संसार अपना माना था

घर मेरा जला कर
क्या तुम अपने घर गए
सुना है तुम फिर शहर गए

तुम किधर गए
3 महीने पहले
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samarth dalela

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