विज्ञापन

मिलेगा कुछ न ख़ाली बंदगी से।

Arun Sharma

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            सियासत भर गई है गंदगी से,
        
                                                    
                            
वो बाज़ आते नहीं फिर भी बदी से

सुधारों की करी जब बात हमने ,
लगे हैं ज़ुल्म करने वो तभी से।

नशे में चूर सत्ता के रहे वो,
पड़ा भारी उलझना जेन ज़ी से।

तिरंगे के लिए है जान हाज़िर ,
नहीं डरते तुम्हारी हथकड़ी से।

उतारो वेद सारे आचरण में ,
मिलेगा कुछ न ख़ाली बंदगी से।
2 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajan

30 कविताएं

View Profile