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मिलेगा कुछ न ख़ाली बंदगी से।

                
                                                         
                            सियासत भर गई है गंदगी से,
                                                                 
                            
वो बाज़ आते नहीं फिर भी बदी से

सुधारों की करी जब बात हमने ,
लगे हैं ज़ुल्म करने वो तभी से।

नशे में चूर सत्ता के रहे वो,
पड़ा भारी उलझना जेन ज़ी से।

तिरंगे के लिए है जान हाज़िर ,
नहीं डरते तुम्हारी हथकड़ी से।

उतारो वेद सारे आचरण में ,
मिलेगा कुछ न ख़ाली बंदगी से।
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45 मिनट पहले

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