धर्म का नाम फ़रेबों में लगी है दुनिया ,
अंध विश्वास के चक्कर में फँसी है दुनिया।
आग नफ़रत की लगी आज जिधर भी देखो,
हर तरफ़ ख़ून-ख़राबे में लगी है दुनिया।
बादशह भी न झुका पाए कभी दुनिया को,
पर फ़क़ीरों के यहाँ ख़ुद ही झुकी है दुनिया।
जम के हथियार बनाने का नतीजा है ये ,
आज बारूद का इक ढेर बनी है दुनिया।
अपनी मन्ज़िल पे तुझे ख़ुद ही पहुंचना होगा,
ये किसी के न कभी साथ चली है दुनिया ।
अम्न की राह बनाने जो मैं निकला घर से,
बन के दीवार ये राहों में खड़ी है दुनिया ।
-- अरुन शर्मा