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अम्न की राह बनाने जो मैं निकला घर से

                
                                                         
                            धर्म का नाम फ़रेबों में लगी है दुनिया ,
                                                                 
                            
अंध विश्वास के चक्कर में फँसी है दुनिया।

आग नफ़रत की लगी आज जिधर भी देखो,
हर तरफ़ ख़ून-ख़राबे में लगी है दुनिया।

बादशह भी न झुका पाए कभी दुनिया को,
पर फ़क़ीरों के यहाँ ख़ुद ही झुकी है दुनिया।

जम के हथियार बनाने का नतीजा है ये ,
आज बारूद का इक ढेर बनी है दुनिया।

अपनी मन्ज़िल पे तुझे ख़ुद ही पहुंचना होगा,
ये किसी के न कभी साथ चली है दुनिया ।

अम्न की राह बनाने जो मैं निकला घर से,
बन के दीवार ये राहों में खड़ी है दुनिया ।

-- अरुन शर्मा
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55 मिनट पहले

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