जो बना बैठा है राजा मुल्क़ का,
कॉकरोचों की झलक से डर गया।
कुछ ग़लत तो हो रहा सरकार से,
ख़ौफ़ इतना क्यूं उसे आख़िर हुआ ।
हो रही मंहगी यहां हर चीज़ है
आदमी का दाम गिरता जा रहा।
प्यार के मिटने लगे नामों निशाँ,
नफ़रतों का बोलबाला हो गया ।
मर रहे मासूम बच्चे जंग में ,
इस ज़मीं का है न क्या कोई ख़ुदा।
हर तरफ़ ही ख़ौफ़ का माहौल है,
ज़ुल्म की अब हो गई है इंतिहा ।