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कॉकरोच ग़ज़ल

                
                                                         
                            जो बना बैठा है राजा मुल्क़ का,
                                                                 
                            
कॉकरोचों की झलक से डर गया।

कुछ ग़लत तो हो रहा सरकार से,
ख़ौफ़ इतना क्यूं उसे आख़िर हुआ ।

हो रही मंहगी यहां हर चीज़ है
आदमी का दाम गिरता जा रहा।

प्यार के मिटने लगे नामों निशाँ,
नफ़रतों का बोलबाला हो गया ।

मर रहे मासूम बच्चे जंग में ,
इस ज़मीं का है न क्या कोई ख़ुदा।

हर तरफ़ ही ख़ौफ़ का माहौल है,
ज़ुल्म की अब हो गई है इंतिहा ।
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3 महीने पहले

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