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पाषाणों का आश्रय पा कर भी

ARAVINDA MOHUN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पाषाणों का आश्रय पा कर भी
        
                                                    
                            
झूठी गाथा अल्पजीवी होती है।।
झंझावातों का संबल संग पा
सागर तरंग उन्हें डुबोती है।।
आंखों आंखों में सच जानें सब
झूठ की महिमा झूठी होती है।
झंझावातों में भी जो चमक बिखेरें
गाथा उनकी युग की चेरी होती है
2 महीने पहले
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