पाषाणों का आश्रय पा कर भी
झूठी गाथा अल्पजीवी होती है।।
झंझावातों का संबल संग पा
सागर तरंग उन्हें डुबोती है।।
आंखों आंखों में सच जानें सब
झूठ की महिमा झूठी होती है।
झंझावातों में भी जो चमक बिखेरें
गाथा उनकी युग की चेरी होती है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X