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नासमझी में जब समझदारी की

ARAVINDA MOHUN

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नासमझी में जब समझदारी की आने लगे झलक
        
                                                    
                            
समझो बचपन की ड्योढ़ी पर जवानी की है धमक।।
फीकी पड़ने लग जाती चमक, अगर बहकी जवानी
की धमक, धमकाने लगे बुजुर्गों की शख्सियत।।
जवां जीवन को भी पड़ती रही बुजुर्गों की जरूरत
आगोशे-नशे में न हो कभी तौहीने बुजुर्गियत ।।
7 घंटे पहले
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