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नासमझी में जब समझदारी की

                
                                                         
                            नासमझी में जब समझदारी की आने लगे झलक
                                                                 
                            
समझो बचपन की ड्योढ़ी पर जवानी की है धमक।।
फीकी पड़ने लग जाती चमक, अगर बहकी जवानी
की धमक, धमकाने लगे बुजुर्गों की शख्सियत।।
जवां जीवन को भी पड़ती रही बुजुर्गों की जरूरत
आगोशे-नशे में न हो कभी तौहीने बुजुर्गियत ।।
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5 घंटे पहले

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