झूठ जाल फरेब से, जो, ताउम्र, ठगते रहे औरों को
खुद को चूना लगता देख, बहुत घबराये।।
हाय हाय कर जो झूठी तसल्लियां देते रहे औरों को
देख, अपने दर, बर्बादी के आसार बहुत घबराये ।।
देख अपनी बर्बादियों का मंज़र वे ही बहुत घबराये
औरों की बर्बादियों पर जो थे बहुत खिलखिलाये।।