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कृपा की छांव रखना

अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्रभु आप अपनी,
        
                                                    
                            
कृपा की छांव रखना,
पल भर भी ना बिसारूं,
बस इतना ध्यान रखना।।

मझधार है भंवर है,
जीवन का ऐ सफर है,
कभी डगमगाए नैया तो,
पतवार बन के रहना।।

अज्ञान है जीवन में,
छाया घना अंधेरा,
मैं हूं तेरे सहारे,
सब कुछ तूं ही है मेरा।।

तेरा ही आसरा है,
बस मुझको मेरे भगवन,
हर पल प्रभु मुझे बस,
अपनी शरण में रखना।
~अर्द्धचंद्रधारी त्रिपाठी
4 घंटे पहले
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