माँ सिर्फ अपने बच्चों की माँ बनकर क्यों सिमट जाती है?
माँ की ममता क्या अपने बच्चों तक सिमट कर रह जाती है?
क्यों नहीं एक माँ समस्त विश्व के बच्चों की माँ बन पाती है?
क्या उसका प्यार इतना सीमित है, या उसकी ममता का विस्तार नहीं?
माँ की गोद में बस एक दुनिया होती है,
पर उसकी ममता का कोई सीमा नहीं होती।
काश माँ की ममता का विस्तार हो,
समस्त विश्व के बच्चों को उसका आशीर्वाद हो।