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मकर संक्रांति की पावन बेला आई

Aparna Pradhan

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मकर संक्रांति की पावन बेला आई
        
                                                    
                            

मंदिर में शंख नाद की गूँज लहराई
खुशी की लाली आसमान पर छाई
सूर्य के आँगन में बजने लगी शहनाई
दक्षिण से उत्तर की ओर
सूरज ने अपनी राह घुमा कर
शुभ घड़ी की शुरुआत कराई

मकर संक्रांति की पावन बेला आई

प्रकृति में बदलाव लाई
शीत ऋतु की मद्धम चाल कर के
दिन लम्बे और छोटी रातें लाई
गुनगुनी धूप मन को भाई
रंग बिरंगे फूलों से बगिया मुस्कुराई
किसानों के चेहरे पर खुशी छाई
अन्नपूर्णा स्वयं घर उनके आई

मकर संक्रांति की पावन बेला आई

सपनों के मांजे उंगलियों पर लपेटे
मन में उम्मीदों के परिंदे उड़ाती आई
विश्वास की डोर से बंधी हुई
उल्लास की पतंगे आसमान में लहराईं
गुड़ की मिठास तिल में समा कर
जीवन में ख़ुशियों की बहार लाई

मकर संक्रांति की पावन बेला आई

डा॰ अपर्णा प्रधान

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5 वर्ष पहले
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