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किस आज़ादी का जश्न मना रहे हो तुम

Anurag vishwkarma (aiyaar)

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            किस आज़ादी का जश्न मना रहे हो तुम,
        
                                                    
                            
जहाँ किसी पर होते अत्याचार देख,
लोग अपनी राह निकल जाते हैं।

फिर खुद को देशभक्त कहने का
इतना गुरूर कैसा?
ज़रा सोचो—
अगर किसी और के दर्द पर
तुम्हारी आँखें नहीं नम होतीं,
तो तिरंगे के सामने
सिर्फ़ सिर झुकाना ही देशभक्ति नहीं है।

देशभक्ति तब है,
जब किसी बेगुनाह पर ज़ुल्म हो
और तुम्हारी आवाज़ उसके साथ खड़ी हो।

 
2 महीने पहले
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