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किस आज़ादी का जश्न मना रहे हो तुम

                
                                                         
                            किस आज़ादी का जश्न मना रहे हो तुम,
                                                                 
                            
जहाँ किसी पर होते अत्याचार देख,
लोग अपनी राह निकल जाते हैं।

फिर खुद को देशभक्त कहने का
इतना गुरूर कैसा?
ज़रा सोचो—
अगर किसी और के दर्द पर
तुम्हारी आँखें नहीं नम होतीं,
तो तिरंगे के सामने
सिर्फ़ सिर झुकाना ही देशभक्ति नहीं है।

देशभक्ति तब है,
जब किसी बेगुनाह पर ज़ुल्म हो
और तुम्हारी आवाज़ उसके साथ खड़ी हो।

 
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एक घंटा पहले

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