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गोल्ड मेडल

anurag tiwary

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कमरे के स्टैंड फैन की पंखियाॅं बिजली के हाई वोल्टेज आने से जब पूरी रफ़्तार में घूमीं तो दीवाल पे टंगे हुए बचपन के जीते कुछ गोल्ड मेडल खन- खन की आवाज से बज उठे।
        
                                                    
                            
ऐसा लगा जैसे इशारे कर रहे हों, कि क्या हुआ अब?
ज़रा देखो, आख़िर ये सब तुमने ही तो जीत रखे हैं न?
तुम्हें इसकी संख्या बढा़ती रहनी चाहिए।
उसी वक्त, खिड़की के बाहर भी अचानक तेज़ हवा बहती है ।
और पास के शीशम की मुलायम पत्तियों की सरसराहट ऐसी जोर से होती हैं जैसे तालियाँ बजा के बोल उठे हों वे कि_
''हां, हम सब भी तुम्हारे साथ हैं''!
एक महीने पहले
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