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गोल्ड मेडल

                
                                                         
                            कमरे के स्टैंड फैन की पंखियाॅं बिजली के हाई वोल्टेज आने से जब पूरी रफ़्तार में घूमीं तो दीवाल पे टंगे हुए बचपन के जीते कुछ गोल्ड मेडल खन- खन की आवाज से बज उठे।
                                                                 
                            
ऐसा लगा जैसे इशारे कर रहे हों, कि क्या हुआ अब?
ज़रा देखो, आख़िर ये सब तुमने ही तो जीत रखे हैं न?
तुम्हें इसकी संख्या बढा़ती रहनी चाहिए।
उसी वक्त, खिड़की के बाहर भी अचानक तेज़ हवा बहती है ।
और पास के शीशम की मुलायम पत्तियों की सरसराहट ऐसी जोर से होती हैं जैसे तालियाँ बजा के बोल उठे हों वे कि_
''हां, हम सब भी तुम्हारे साथ हैं''!
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एक महीने पहले

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