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क्या तृतीय विश्वयुद्ध का आगाज है ये?

anuradha sahani

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                            क्या तृतीय विश्वयुद्ध का आगाज है ये?
        
                                                    
                            
पहले रूस-यूक्रेन फिर बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन।
नही बचा पड़ोसी देश नेपाल भी
जेन जी ने वहाँ भी किया सत्ता पलट।
अब इजरायल-ईरान
लड़ रहे हैं पटल पर।
इतिहास की जड़ों में देखें तो,
धर्म का मुद्दा इसमें भी है प्रबल।
सिया मुस्लिम और यहूदी का संघर्ष,
तत्कालिक कारण था परमाणु परीक्षण।
अमेरिका है इसमें बड़ा मुखिया,
पंच परमेश्वर के भरोसे सारी दुनियां।
हिजाब के लिए मार दिया
धर्म के नाम पर महिला स्वतंत्रता का हनन किया।
अमेरिका खुद को विश्व का मुखिया समझता है,
अपने आंतरिक मामलों में कम,
दूसरे के विदेशी मामलों में ज्यादा झाँकता है।
पैसा देता है,पावर देता है
जिधर चाहता,वो विजेता होता है।
असल मे युध्द अब दो देशों के बीच नहीं,
अमेरिका बनाम पूरा वर्ल्ड होता है।
पहले प्रोटेस्ट, फिर सत्ता परिवर्तन,फिर युध्द
यही पैटर्न चलता है।
दो बिल्लियों के लड़ाई में
फायदा बन्दर उठता है।
मिडिल ईस्ट से मॉडर्न वेस्ट तक,
हालात कुछ ठीक नही है।
ऐसा लगता है
अमेरिका ने हर ओर हाहाकार मचाई है।
वेनेजुएला का हाल भी सबको पता है,
भारत पर भी कसा टैरिफ का शिकंजा है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान में भी तनातनी छाई है
गहरी होती दिख रही खाई है,
वहाँ से भी बम और चीखों की आवाज सुनाई है।
कौन है जिसनें युध्द बिगुल बजाई है?
कहीं इसमें अमेरिका का तो हाथ नही?
या कहीं ये तृतीय विश्वयुध्द का तो आगाज नही?
लोकतंत्र के नाम पर युध्द कराना
कहीं ये सोची समझी चाल तो नही?
यूनाइटेड नेशन की भूमिका भी खतरें में आई है।
अबतक उसने कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाई है?
-अनुराधा कामेंद्र साहनी
6 महीने पहले
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