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हिंदुस्तान की हुंकार

Anuj Kumar Agrendu

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            पहलगाम की वादियों में, छाया था अंधेरा गहरा,
        
                                                    
                            
आतंक का साया आया, निर्दोषों का जीवन छीना।

खून से लथपथ धरती, रोया था हर एक कण,
पर हिंदुस्तान की माटी में, जागा अटल संकल्प वन।

ऑपरेशन सिंदूर आया, जैसे शिव का त्रिशूल प्रचंड,
न्याय का वज्र गिरा, आतंक का अंत हुआ अखंड।

नौ ठिकानों पर गूंजी, हिंदुस्तानी सेना की हुंकार,
लश्कर, जैश का घमंड चूर, मिटा आतंक का संसार।

हिंदुस्तानी जवान, वीरता की मिसाल बने,
सीमा पर खड़े अडिग, दुश्मन के सामने सजने।

सिंदूर सा लाल रंग, शहीदों का बलिदान बता,
हर सैनिक की गाथा, देशभक्ति का गान सदा।

राजनीति की राहों में, देशभक्ति का ज्वार उठा,
तिरंगा यात्री, जय हिंद सभा, एकता का राग सुना।

मोदी की हुंकार गूंजी, "आतंक का जवाब देंगे",
हर भारतवासी का संकल्प, "हम एक साथ चलेंगे"

।पाक की साजिश टूटी, जब ब्रह्मोस ने रण सजाया,
न्याय की आग बनी, आतंक का अंत कर डाला।

कश्मीर से कन्याकुमारी, एक स्वर में गूंजे नारा,
"भारत माता की जय", हर दिल में देशभक्ति का सहारा।

हिमांशी की आँखों में, आंसुओं का सैलाब था,
सिंदूर मिटा माथे से, फिर भी हौसला अडिग रहा।

हर विधवा की पुकार, हर शहीद की चित्कार,
हिंदुस्तान ने सुना, और उठा तूफान अपार।

आज हर माँ, हर बहन, सिंदूर सजाती है,
सैनिकों की वीरता को, हृदय से याद करती है।

राजनीति हो या रणक्षेत्र, एकजुट है भारत देश,
आतंक के खिलाफ जंग में, हमारा संकल्प विशेष l

जय हिंद, जय भारत, गूंजे यह नारा सदा,
हिंदुस्तानी सेना की जय, जो रक्षा करे नित्य नया।

पहलगाम की पुकार पर, सिंदूर बना प्रतिशोध का रंग,
देशभक्ति का यह गीत, गाएगा भारत का जन जन।
एक वर्ष पहले
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