रैन गँवाई सोय बिन, दिवस न चेते अंध।
काम-काज सूझै नहीं, पड़ा मोह का बंध॥
हँसे तो दुनिया मुख कतरै, रोए धीरज खोय।
नासमझ इस संसार में, चाहत पूरी न होय॥