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भरोसे का आईना

Anubhav Mishra

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कभी हर किसी की बात पर हँसा करते थे हम,
        
                                                    
                            
कभी हर किसी की बात पर हँसा करते थे हम।
बिना कुछ सोचे, बिना कुछ कहे,
सब कुछ सह लिया करते थे हम।

एहसास हमें था कि कुछ गलत किया करते हैं हम,
एहसास हमें था कि कुछ गलत किया करते हैं हम।
पर भरोसे के आगे,
इसे नकार दिया करते थे हम।

कुछ समय बाद हमें यह ज्ञात हुआ,
कि बहुत ग़लत हुआ करते थे हम।
एक घंटा पहले
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