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भरोसे का आईना

                
                                                         
                            कभी हर किसी की बात पर हँसा करते थे हम,
                                                                 
                            
कभी हर किसी की बात पर हँसा करते थे हम।
बिना कुछ सोचे, बिना कुछ कहे,
सब कुछ सह लिया करते थे हम।

एहसास हमें था कि कुछ गलत किया करते हैं हम,
एहसास हमें था कि कुछ गलत किया करते हैं हम।
पर भरोसे के आगे,
इसे नकार दिया करते थे हम।

कुछ समय बाद हमें यह ज्ञात हुआ,
कि बहुत ग़लत हुआ करते थे हम।
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44 मिनट पहले

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