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गुल सहमें हैं , खार मज़े में । नफ़रत के दरबार मज़े में ।

Anshuman Patel

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            गुल सहमें हैं , खार मज़े में ।
        
                                                    
                            
नफ़रत के दरबार मज़े में ।

झूठी ख़बरें छाप रहा है ,
फिर भी है अख़बार मज़े में ।

थोड़ी-थोड़ी पीकर अब तो,
रहता थानेदार मज़े में ।

जबसे चोर बना है नेता,
घूम रहा मक्कार मज़े में ।

रोती है जनता तो रोए,
'अंशू' है सरकार मज़े में ।
-अंशुमान पटेल
 
3 महीने पहले
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