गुल सहमें हैं , खार मज़े में ।
नफ़रत के दरबार मज़े में ।
झूठी ख़बरें छाप रहा है ,
फिर भी है अख़बार मज़े में ।
थोड़ी-थोड़ी पीकर अब तो,
रहता थानेदार मज़े में ।
जबसे चोर बना है नेता,
घूम रहा मक्कार मज़े में ।
रोती है जनता तो रोए,
'अंशू' है सरकार मज़े में ।
-अंशुमान पटेल
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