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फिर वही भूख, फिर वही रोटी का सवाल

Anshuman Gupta

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फिर वही भूख, फिर वही रोटी का सवाल
        
                                                    
                            
हाथ मलते लाचार मजदूर किसान
चुल्हे के पास बैठी खाली तवे को देखती
मां परेशान-हलकान
बेटे के हाथ में डिग्री
फिर भी नहीं कोई पहचान
दंगों के लपट में
जलते- सुलगते शहर
लाशों की फसल पर
सजती सियासत की दूकान
कहीं कोई हरकत नहीं
न कोई जुलूस-मसाल
किस - किस भेष में लोग
अवाम को लूट रहे हैं
है न! हमारी जम्हुरियत की
यह शानदार पहचान।
-लालचंद गुप्ता.....
एक घंटा पहले
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