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क़िस्मत फिर उसी राह पर ले आती है

Anshu Joshi

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अजब भूल-भुलैया है ये तेरा इश्क़ भी,
        
                                                    
                            
हर मोड़ पे वही राह नज़र आती है—
जिस तरफ़ से गुज़र चुका होता है “आशिक़”,
क़िस्मत फिर उसी राह पर ले आती है।
एक दिन पहले
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Aditya Mishra

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