अजब भूल-भुलैया है ये तेरा इश्क़ भी,
हर मोड़ पे वही राह नज़र आती है—
जिस तरफ़ से गुज़र चुका होता है “आशिक़”,
क़िस्मत फिर उसी राह पर ले आती है।
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