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उड़ान बनाम इंसान

Anoop kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कितनी अलग परिदों की दुनिया,
        
                                                    
                            
होकर देखा उनके जैसा I

तब ये जाना सच में हमने
कीमत नहीं है कोई पैसा II

वहां सच-झूठ का खेल नहीं ,
रिश्तों में कोई झोल नहीं I

यहाँ रिश्ते-नाते ,
यार-दोस्त, सब पैसों से I
बिन पैसों के कोई न वैसा II
2 महीने पहले
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