कितनी अलग परिदों की दुनिया,
होकर देखा उनके जैसा I
तब ये जाना सच में हमने
कीमत नहीं है कोई पैसा II
वहां सच-झूठ का खेल नहीं ,
रिश्तों में कोई झोल नहीं I
यहाँ रिश्ते-नाते ,
यार-दोस्त, सब पैसों से I
बिन पैसों के कोई न वैसा II
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