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और उन आखों में बस हमने मजबूरियों की सैलाब उतरते देखी है

Anoop kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ये दुनिया बस इंसानियत की बातें करते देखी है
        
                                                    
                            
वरना हर तरफ हमने इंसानियत मरते देखी है I
बढता नहीं कोई हाथ उन हाथों की ओर
जो फैले थे बड़ी उम्मीद में
उन आखों में बस हमने मजबूरियों की सैलाब उतरते देखी है II
9 महीने पहले
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Anil Pandey

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