ये दुनिया बस इंसानियत की बातें करते देखी है
वरना हर तरफ हमने इंसानियत मरते देखी है I
बढता नहीं कोई हाथ उन हाथों की ओर
जो फैले थे बड़ी उम्मीद में
उन आखों में बस हमने मजबूरियों की सैलाब उतरते देखी है II
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