आज पूरा दिन
ये बारिश
सूरज का न उगना
मुझे सूरज पसंद है
वो रोज़ मुझे मेरे
दरवाजे पर मुस्कुराता हुआ मिलता है
मै उसकी सुनहरी किरणे
याद करता हूँ
उन किरणों की गर्माहट को याद करता हूँ
मै आज की पानी की बूंदों को याद करता है
दीवारों से जो रिस रहा है
वे पानी की बूंदे नहीं
मेरी भावना है
जो सामने भीगी दीवार है
वो मेरे भीतर भी भीग रही है।
और मै बस सोच रहा हूँ
ऐसे में क्या कर सकते है
क्या ही किया जाए
सिवाय इंतजार के
कभी कभी इंतज़ार ज्यादा भारी होता है
क्योंकि सामना करना ज्यादा आसान हो जाता हूँ
मै सोचता हूं
की मेरा इंतजार तुम्हारे लिए सच है
मै सोचता हूँ कि तुम सच हो l