मै सोचता हूँ
जितना पेड़ो के बारे में सोचोगे
उतनी बरखा होगी
विनोद पदराज कहता है
तुम सौ पेड़ो के नाम लो
और उतनी बरखा होगी
मै नाम लेता हूं
कटहल, बड़हल, बकैना
शहजन, पकरी,बरगद
अमलतास, मौलश्री,नीम
आम,अमरूद,शाखू,
शीशम, कंडेल,महुवा
शहतूत,..............
एक सिर्रै में तो बस इतने
ही नाम याद आते है
आगे कोशिश करता हूं
तो पापा का सहारा लेना पड़ता है
बिल्कुल वैसे जैसे पेड़ों को बरखा का
लेना पड़ता है l
मै सोचता हूँ
जितने नाम बढ़ते जायें
बस उतनी बरखा होती जाये l