विज्ञापन

अट्ठारह

Anoop Ali

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कुछ नहीं थे वो तुम्हारे
        
                                                    
                            
तो कैसे बन जाता वो तुम्हारा
वो तो सोचता था वो है नंबर वन
पर बन बैठा अट्ठारह
मैने समझाया उसे वो नहीं कोई देवी
न ही कोई सृजनहारा
पर उसकी घड़ी ,अटकी थी
और घड़ी में होता नहीं—अठारह
पेड़-पौधे, हवा-पानी, सूरज-चाँद,
ज़मीन-आसमान, धूप-साया,रंग, फूल, खुशबू,
तितली, बारिश, बादल, तारे,
सारे के सारे
लगते हैं कितने प्यारे,
पर फिर भी न तुम हुए हमारे
वैसे तो अठारह नंबर अच्छा होता है
महापुराण
कंस का वध
जरासंध का आक्रमण
महाभारत का युद्ध,
और उसके पर्व
और जीवित बचे योद्धा
अक्षौहिणी सेना,
गीता के अध्याय,
सभी अठारह सभी विशेष
मै ही अठारह
जो रहा अशेष l
एक घंटा पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Sanjai kumar

103 कविताएं

View Profile