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अट्ठारह

                
                                                         
                            कुछ नहीं थे वो तुम्हारे
                                                                 
                            
तो कैसे बन जाता वो तुम्हारा
वो तो सोचता था वो है नंबर वन
पर बन बैठा अट्ठारह
मैने समझाया उसे वो नहीं कोई देवी
न ही कोई सृजनहारा
पर उसकी घड़ी ,अटकी थी
और घड़ी में होता नहीं—अठारह
पेड़-पौधे, हवा-पानी, सूरज-चाँद,
ज़मीन-आसमान, धूप-साया,रंग, फूल, खुशबू,
तितली, बारिश, बादल, तारे,
सारे के सारे
लगते हैं कितने प्यारे,
पर फिर भी न तुम हुए हमारे
वैसे तो अठारह नंबर अच्छा होता है
महापुराण
कंस का वध
जरासंध का आक्रमण
महाभारत का युद्ध,
और उसके पर्व
और जीवित बचे योद्धा
अक्षौहिणी सेना,
गीता के अध्याय,
सभी अठारह सभी विशेष
मै ही अठारह
जो रहा अशेष l
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48 minutes ago

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