विज्ञापन

देशप्रेम : पुलवामा

ANNU RATHORE

Mere Alfaz
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            प्रेम में लुटाते हैं लोग दिल , वो जान भी वतन पर लूटा गए,
        
                                                    
                            
प्रेम दिवस पर सभी को अपना वतन प्रेम दिखा गए ।

देश के वो वीर रक्षक आज चिथड़ों में बिखरे पड़े हैं,
देश हित में हुए समर्पित, देश प्रेम का अर्थ हमें समझा गए।

जिस बहन ने बांधी थी राखी,
बक्से में भाई नहीं,सिर्फ भाई की कलाई थी।
पत्नी बिलख पड़ी झांक कर बक्से में,सिर्फ अंगूठी थी सगाई की।
जो तीरंगे में लिपटा सोया है,
दो दिन बाद शादी थी उसके भाई की,
अंतिम विदा दे रही है बहना,जिसकी खुद कुछ दिनों बाद विदाई थी।

प्रेम में लुटाते हैं लोग दिल , वो जान भी वतन पर लुटा गए,
प्रेम दिवस पर सभी को अपना वतन प्रेम दिखा गए।

मां ढूंढे रही अपने लाल को,चीथड़े देख बदहवास थी,
पिता की लाठी टूटी,टूट गई अब हर आस भी।
पत्नी कहे कफ़न हटा के,यूं छोड़ कर क्यूं चले गए,
मांग का सिंदूर पोंछ कर, हाय! अब बन गई वो जिंदा लाश थी।
रुक नहीं रहे थे आंसु इतना वो लाचार था,
जो आज बक्से में है वो मेरे बचपन का वो यार था।
बच्चों से छीन गया साया पिता का,ज़िन्दगी उनकी अब हताश थी ।

प्रेम में लुटाते हैं लोग दिल , वो जान भी वतन पर लुटा गए,
प्रेम दिवस पर सभी को अपना वतन प्रेम दिखा गए।।

नमन🙏🏻😔🇮🇳
 
हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।  आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Nema Ram

141 कविताएं

View Profile