प्रेम में लुटाते हैं लोग दिल , वो जान भी वतन पर लूटा गए,
प्रेम दिवस पर सभी को अपना वतन प्रेम दिखा गए ।
देश के वो वीर रक्षक आज चिथड़ों में बिखरे पड़े हैं,
देश हित में हुए समर्पित, देश प्रेम का अर्थ हमें समझा गए।
जिस बहन ने बांधी थी राखी,
बक्से में भाई नहीं,सिर्फ भाई की कलाई थी।
पत्नी बिलख पड़ी झांक कर बक्से में,सिर्फ अंगूठी थी सगाई की।
जो तीरंगे में लिपटा सोया है,
दो दिन बाद शादी थी उसके भाई की,
अंतिम विदा दे रही है बहना,जिसकी खुद कुछ दिनों बाद विदाई थी।
प्रेम में लुटाते हैं लोग दिल , वो जान भी वतन पर लुटा गए,
प्रेम दिवस पर सभी को अपना वतन प्रेम दिखा गए।
मां ढूंढे रही अपने लाल को,चीथड़े देख बदहवास थी,
पिता की लाठी टूटी,टूट गई अब हर आस भी।
पत्नी कहे कफ़न हटा के,यूं छोड़ कर क्यूं चले गए,
मांग का सिंदूर पोंछ कर, हाय! अब बन गई वो जिंदा लाश थी।
रुक नहीं रहे थे आंसु इतना वो लाचार था,
जो आज बक्से में है वो मेरे बचपन का वो यार था।
बच्चों से छीन गया साया पिता का,ज़िन्दगी उनकी अब हताश थी ।
प्रेम में लुटाते हैं लोग दिल , वो जान भी वतन पर लुटा गए,
प्रेम दिवस पर सभी को अपना वतन प्रेम दिखा गए।।
नमन🙏🏻😔🇮🇳
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