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दर्द-ए-दिल को भी यूं चुपचाप सहा करते हैं

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम सनम तुमसे यही बात कहा करते हैं
        
                                                    
                            
हम कहीं और नहीं दिल में रहा करते हैं

शोर करने की नहीं है कोई आदत अपनी
दर्द-ए-दिल को भी यूं चुपचाप सहा करते हैं

बेवजह लफ़्ज़ को ज़ाया नहीं करते हैं हम
सोचकर ही कोई हम बात किया करते हैं

अपना ये हाल की ख़ुद ज़ख्म लगा लेते हैं
और फिर बाद में ख़ुद उसकी दवा करते हैं

और क्या चाहें ख़ुदा से कहो ये अब तुम ही
हम बस एक तुझसे ही मिलने की दुआ करते हैं

आज तक बात नहीं मेरी समझ आई ये
लोग क्यों चाहने वालों को जुदा करते हैं

एक तरफ़ लोग हैं ज़िन्दों को भुला देते हैं
और एक हम हैं कि यादों को जमा करते हैं

और तो कुछ नहीं होता है बिछड़कर जाना
रात दिन आँखों से बस अश्क बहा करते हैं।
-अनमोल
एक घंटा पहले
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