विज्ञापन

कोई शिकवा भी नहीं कोई शिकायत भी नहीं

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कोई शिकवा भी नहीं कोई शिकायत भी नहीं
        
                                                    
                            
दिल को तेरी थी जो पहले अब वो आदत भी नहीं

सारे ख़त जो थे तुम्हारे वो जला मैंने दिये
अब तो मेरे पास तेरी कोई अमानत भी नहीं

पहले ये दिल मेरा तेरे दीद को बेचैन था
कुछ दिनों से अब यहां दिल को ये हसरत भी नहीं

हां ये था आसान कि रोकर बहल जाएगा दिल
पर करें क्या कि हमें इसकी इजाज़त भी नहीं

एक तुम्हारे नाम का कलमा पढ़ा है मैंने जाँ
और अब इसके सिवा कोई इबादत भी नहीं।
-अनमोल
10 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all