विज्ञापन

तु सामने था पर न कहीं तु मिला मुझे (ग़ज़ल)

Anmol Sinha

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तु सामने था पर न कहीं तु मिला मुझे
        
                                                    
                            
खोजी तुझे नज़र न कहीं तु मिला मुझे

ता उम्र जैसे मुझको भी तेरी तलाश थी
फिर शाम और सहर न कहीं तु मिला मुझे

सोचा कि देख लूं तुझे मैं तेरे घर ही में
देखा जो तेरे घर न कहीं तु मिला मुझे

कुछ ऐसे तु यहां जुदा मुझसे हुआ कि फिर
आई तेरी ख़बर न कहीं तु मिला मुझे

चलते हुए मैं संग जो तेरे रुका यहां
फिर मेरे हमसफ़र न कहीं तु मिला मुझे।
-अनमोल
2 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile